नूंह विधानसभा सीट: कभी खाता नहीं खोल पाई है ​बीजेपी

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मेवात की नूंह विधानसभा सीट कई बार राजनैतिक वर्चस्व की लड़ाई की गवाह बनी है। खुर्शीद अहमद व रहीम खान के परिवार के बीच यहां हमेशा जोर आजमाइश रही है। इस सीट पर बीजेपी को कभी भी चुनाव जीतने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ।

गुड़गांव
मेवात की नूंह विधानसभा सीट कई बार राजनैतिक वर्चस्व की लड़ाई की गवाह बनी है। खुर्शीद अहमद व रहीम खान के परिवार के बीच यहां हमेशा जोर आजमाइश रही है। इसके चलते खुर्शीद अहमद 2 बार, जबकि उनके पुत्र आफताब अहमद 1 बार विधायक बने हैं। दूसरी तरफ, रहीम खान निर्दलीय के तौर पर 3 बार विधायक रह चुके हैं। वहीं, उनके भाई सरदार खान भी एक बार विधायक बने हैं। कुछ साल बाद इस राजनीतिक अखाड़े में तैयब हुसैन का परिवार भी कूद पड़ा। तैयब के भाई हामिद हुसैन ने 2000 में आईएनएलडी के टिकट पर और तैयब हुसैन की बेटे जाकिर हुसैन ने 2014 में आईएनएलडी के टिकट पर चुनाव जीता।

हालांकि, इस सीट पर बीजेपी को कभी भी चुनाव जीतने का सौभाग्य प्राप्त नहीं हुआ। हालांकि, अब हालात बदले हुए दिखाई दे रहे हैं। मौजूदा विधायक जाकिर हुसैन कुछ दिन पहले ही बीजेपी जॉइन कर चुके हैं। पिछले कुछ दिनों के राजनीतिक प्रकरण में मेवात की तीनों सीटों के मौजूदा विधायक बीजेपी में शामिल हो चुके हैं। एक वक्त ऐसा आया कि मेवात में बिना चुनाव लड़े ही बीजेपी ने पूरा मेवात भगवा रंग में रंग दिया। राजनीतिक जानकारों के अनुसार यह पहली बार होगा कि नूंह फिरोजपुर झिरका और पुनहाना सीट पर बीजेपी का पलड़ा भारी हो सकता है। वैसे तो मेवात में 1996 में तावडू सीट पर सूरज पाल सिंह बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीत चुके हैं, लेकिन परिसीमन में तावडू सहित खत्म कर दी गई। उसका कुछ हिस्सा सोहना विधानसभा में और कुछ नूंह विधानसभा में जोड़ दिया गया।

नूंह विधानसभा पर बीजेपी के पास आईएनएलडी से आए जाकिर हुसैन मौजूद हैं। इसके साथ ही बीजेपी के जिला अध्यक्ष सुरेंद्र प्रताप आर्य, जाहिद हुसैन बाई और शारिक हुसैन मालब भी टिकट पाने की भागदौड़ में जुटे हैं। उधर, कांग्रेस में आफताब अहमद मजबूत दावेदार हो सकते हैं। आफताब अहमद हुड्डा समर्थक माने जाते हैं। तंवर समर्थक फखरुद्दीन व सनाउल्लाह खान भी टिकट की दौड़ में शामिल दिख रहे हैं। जेजेपी के पास नूंह में उनके जिला अध्यक्ष बदरुद्दीन व तैयब हुसैन मुख्य रूप से टिकट पाने की दौड़ में हैं। यह सीट आईएनएलडी के लिए हमेशा पसंदीदा रही है। यहां पार्टी ने 3 बार जीत हासिल की है। लेकिन, अब हालात बदल चुके हैं, ऐसे में आईएनएलडी के पास बहुत ज्यादा विकल्प नहीं हैं। माना जा रहा है कि रणजीत सिंह नंबरदार उसके प्रत्याशी हो सकते हैं।

दावेदार हो सकते हैं। आफताब अहमद हुड्डा समर्थक माने जाते हैं। तंवर समर्थक फखरुद्दीन व सनाउल्लाह खान भी टिकट की दौड़ में शामिल दिख रहे हैं। जेजेपी के पास नूंह में उनके जिला अध्यक्ष बदरुद्दीन व तैयब हुसैन मुख्य रूप से टिकट पाने की दौड़ में हैं। यह सीट आईएनएलडी के लिए हमेशा पसंदीदा रही है। यहां पार्टी ने 3 बार जीत हासिल की है। लेकिन, अब हालात बदल चुके हैं, ऐसे में आईएनएलडी के पास बहुत ज्यादा विकल्प नहीं हैं। माना जा रहा है कि रणजीत सिंह नंबरदार उसके प्रत्याशी हो सकते हैं।

पिछले कुछ महीनों में मेवात का राजनीतिक घटना चक्र बहुत तेजी से बदला है। जहां बीजेपी का खाता भी नहीं खुलता था, अब वहां के तीनों विधायक बीजेपी जॉइन कर चुके हैं। मेव वोटों के नाम पर पार्टी को कभी भी समर्थन नहीं मिला। वह अपने परंपरागत वोटों के सहारे चुनाव लड़ती रही। मौजूदा हालात में जहां एक तरफ पार्टी के पास 3 मजबूत कैंडिडेट हैं, वहीं दूसरी ओर बीजेपी के परंपरागत मतदाता असमंजस में हैं कि वह ऐसी स्थिति में वे पार्टी का साथ दें या नहीं। माना जा रहा है कि इस बार हालात के देखते हुए ऐसा लग रहा है कि मेवात में मुकाबला जोरदार होगा।

गुड़गांव लोकसभा क्षेत्र में मेवात की 3 विधानसभा सीट आती हैं। इनमें से नूंह विधानसभा क्षेत्र को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां अक्सर 2 राजनीतिक परिवारों के बीच वर्चस्व की लड़ाई दिखती रही है। राजनीतिक समीकरण में बदलाव के साथ दोनों परिवार एक-दूसरे को मात भी देते रहे हैं।

हरियाणा प्रदेश के गठन के बाद हुए पहले विधानसभा चुनाव में इस सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी रहीम खान ने जीत हासिल की थी। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार खुर्शीद अहमद को मात दी थी। 1967 में इस सीट पर मतदाताओं की संख्या 55 हजार 256 थी, जिनमें से 39 हजार 074 मतदाताओं ने वोट डाला। मत प्रतिशत लगभग 71 फीसदी रहा। कुल डाले गए मतों में 2417 वोट अवैध हुए। निर्दलीय रहीम खान को 15 हजार 212 मत मिले। जबकि, कांग्रेस के प्रत्याशी खुर्शीद अहमद को 14 हजार 171 वोट हासिल हुए। जनसंघ के प्रत्याशी के सिंह 7 हजार 274 मतों से तीसरे नंबर पर रहे थे।

स्रोत : नवभारत टाइम्स

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