बिहार उपचुनाव में तार-तार हुई महागठबंधन की एकता! क्या करेंगे मांझी, कुशवाहा और सहनी?

0

उपचुनाव को लेकर नामांकन के बाद महागठबंधन का जो स्वरूप सामने आया इसमें यह साफ है कि कांग्रेस और आरजेडी का गठबंधन तो बरकरार रहा, लेकिन अन्य दलों को दावेदारी के बावजूद कोई तरजीह नहीं मिली।

बिहार में पांच विधानसभा सीटों और लोकसभा की एक सीट पर उपचुनाव हो रहे हैं. विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव गुरुवार से चुनाव प्रचार शुरू कर चुके हैं. महागठबंधन के दलों में आरजेडी चार विधानसभा सीट और कांग्रेस ने एक लोकसभा और एक असेंबली सीट के लिए अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं. जाहिर है इसमें अलायंस में शामिल अन्य दलों को कोई जगह नहीं मिली. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या बिहार में महागठबंधन अब महज कागजों पर ही सीमित रह गई है?

दरअसल उपचुनाव को लेकर नामांकन के बाद महागठबंधन का जो स्वरूप सामने आया इसमें यह साफ है कि कांग्रेस और आरजेडी का गठबंधन तो बरकरार रहा, लेकिन अन्य दलों को दावेदारी के बावजूद कोई तरजीह नहीं मिली. जाहिर है यह संकेत है कि महागठबंधन बिहार में कागज पर तो नहीं टूटा है, लेकिन व्यावहारिक रूप से खत्म हो गया है।

दरअसल इसकी शुरुआत तब हुई जब विधानसभा की पांच में से चार सीटें- दरौंदा, सिमरी बख्तियारपुर, बेलहर और नाथनगर से राष्ट्रीय जनता दल ने अपने उम्मीदवारों को उतारने की न सिर्फ घोषणा की, बल्कि लड़ने के लिए पार्टी का सिंबल भी दे दिया।

इसमें सबसे खास बात ये कि कांग्रेस पार्टी शुरू में दो सीटों किशनगंज और सिमरी बख्तियारपुर की मांग कर रही थी. वहीं, हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने नाथनगर से अपने उम्मीदवार के नाम की घोषणा कर दी थी. मांझी ने तो यह ऐलान आरजेडी की घोषणा से भी पहले कर दिया था, लेकिन आरजेडी ने उनकी बात को दरकिनार कर नाथनगर से भी अपना उम्मीदवार उतार दिया।

वहीं, लोकसभा चुनाव में तीन सीटों पर लड़ चुकी सन ऑफ मल्लाह कहे जाने वाले मुकेश सहनी की पार्टी विकासशील इंसाफ पार्टी (VIP) ने भी सिमरी बख्तियारपुर सीट पर लड़ने की घोषणा की थी, लेकिन वहां से भी आरजेडी ने अपना उम्मीदवार उतार दिया।

आरजेडी की ओर से चार सीटों पर लड़ने की घोषणा के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी (पीसीसी) काफी नाराज दिख रही थी और पांचों विधानसभा और एक लोकसभा पर चुनाव लड़ने को तैयार थी. लेकिन, केंद्रीय नेतृत्व के दखल के बाद वो एक विधानसभा और एक लोकसभा सीट पर लड़ने को राजी हो गई।

अगर व्यवहारिक रूप में देखा जाए तो उपचुनाव की लड़ाई में आरजेडी और कांग्रेस तो साथ हैं, लेकिन हम, वीआईपी और आरएलएसपी कहीं सीन में भी नजर नहीं आ रहे।

जाहिर है आरजेडी और कांग्रेस के साथ आने और बाकी दलों को अधिक तरजीह नहीं देने फॉर्मूले पर तेजस्वी यादव चल पड़े हैं. इसी बहाने महागठबंधन में शामिल इन दलों को उन्होंने एक मैसेज भी देने की कोशिश की है कि महागठबंधन का स्वरूप वो जैसा चाहेंगे, वैसा ही होगा।

बता दें कि बिहार में पांच विधानसभा सीटों और लोकसभा के एकमात्र सीट के लिए उपचुनाव 21 अक्टूबर को होना है. इसी दिन महाराष्ट्र और हरियाणा में विधानसभा का चुनाव भी है. वोटों की गिनती मतदान के तीन दिन बाद यानी 24 अक्टूबर को होगा. राज्य की जिन पांच विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव होना है उनमें से चार पर बीजेपी का कब्जा था।

स्रोत : न्यूज़ 18

LEAVE A REPLY