विधानसभा उपचुनाव – आजाद उम्मीदवार के तौर पर लड़ने की दे रहे चेतावनी, नए चेहरे उतारने से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाराज l

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चंडीगढ़. उपचुनाव की घोषणा के बाद कांग्रेस ने जहां सबसे पहले अपने पार्टी उम्मीदवारों की घोषणा कर दी हैं, वहीं पार्टी में बागवत सुर सुनाई देने लगे हैं। पार्टी ने सभी नए चेहरे इन चारों सीटों पर मैदान में उतारे हैं। इससे टिकट की आश लगाए बैठे वरिष्ठ नेता पार्टी से नाराज हैं। हालांकि चारों सीटों में से मुकेरियां सीट पर विरोध नहीं हैं।

यहां से विधायक रजनीश कुमार बब्बी के निधन के बाद उनकी पत्नी इंदुबाला को कांग्रेस ने टिकट दिया है। इनको यहां से सिम्पैथी वोट मिलना तय है। इसलिए यहां इनका विरोध नहीं है। बाकी तीनों सीटों पर पार्टी के विभिन्न नेता नाराज हैं।

सुनील जाखड़ ने इस संबंध में कहा कि पार्टी ने सभी विस क्षेत्रों से जिलाध्यक्षों और कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेकर ही चारों सीटों पर उम्मीदवारों की घोषण की हैं, जहां तक पार्टी नेताओं की नाराजगी का सवाल है, थोड़ी बहुत नाराजगी तो हर इलेक्शन में होती है। उन सभी से बात कर उनको मना लिया जाएगा। मतदान से पहले सभी को एकमंच पर लाया जाएगा और पार्टी चारों सीटों पर जीत दर्ज करेगी।

जलालाबाद से रमिंदर सिंह आवला को यहां से उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बनाया गया है। इस सीट से पूर्व में चुनाव लड़ चुके मलकीत सिंह हीरा को टिकट मिलने की उम्मीद थी, लेकिन उन्हें टिकट न दिए जाने से यहां राय सिख कांग्रेस से नाराज हैं। चूंकि यह िवस क्षेत्र राय सिख बहुल है। अब ऐसा न होने से माना जा रहा है कि राय सिख समुदाय यहां से अपना आजाद उम्मीवार उतार सकता है। वहीं इसी विस क्षेत्र से हंस राज जोशन गुट भी उभर रहा है। सूत्रों के अनुसार वे भी आजाद उम्मीदवार के तौर पर लड़ सकते हैं।

फगवाड़ा यहां से कांग्रेस ने बलविंदर धालीवाल को टिकट दिया है। धालीवाल एक पूर्व आईएएस होने के साथ दलित चेहरा भी है। उनकी छवि भी साफ सुथरी है। यहां से पूर्व विधायक बीजेपी के सोम प्रकाश भी आईएएस हैं। यहां के लोकल पार्टी नेता धालीवाल को टिकट दिए जाने से खुश नहीं है। यहां से पूर्व में चुनाव लड़ चुके जोगिंदर सिंह मान और उनके परिवार का कहना है कि बाहरी कैंडिड्टस को उतारने के बजाय यहां से पार्टी को वरिष्ठ नेता को टिकट देना चाहिए था।

दाखा इस सीट पर कांग्रेस ने कैप्टन संदीप संधू को मैदान में उतारा है। संधू सीएम के पॉलिटिकल सेक्रेटरी हैं। वह सीएम के नजदीकी लोगों में से एक हैं। उन्होंने 2017 के चुनाव में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। यहां भी पार्टी के वरिष्ठ नेता, मेजर सिंह भैणी, अमरीक सिंह आलीवाल और खगूड़ा परिवार नाराज है। इनका कहना है कि पार्टी वरिष्ठ नेता को ही यहां से टिकट दी जानी चाहिए थी। यह सीट चूंकि पहले आम आदमी पार्टी के पास थी, इसलिए आप भी इस सीट पर जोर लगा रही है।

पंजाब के पिछले विधानसभा चुनाव को अपना अंतिम चुनाव बताने वाले सीएम अमरिंदर सिंह ने 2022 के विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत दिए हैं। कैप्टन पंजाब में कांग्रेस के लिए एक मजबूत चेहरा हैं। सीएम ने लिखा है कि वह पंजाब को देश का नंबर वन राज्य बनाने तक आराम से नहीं बैठ सकते। सीएम के अगला चुनाव लड़ने के संकेत से पंजाब में सियासत एक बार फिर से गरमा गई है। कांग्रेस के साथ विपक्षी दलों में भी सीएम के इस संकेत के बाद चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। कैप्टन ने अपने सोशल मीडिया के पेज पर लिखा है कि वह जब तक पीछे नहीं हट सकते जब तक पंजाब के लोगों को उनकी जरूरत है। सूबे के लोगों ने 10 साल तक अकाली शासनकाल को झेला है। ऐसे में यह उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वह उन काले वर्षों की यादों को मिटा कर सूबे को नंबर वन सूबा बना दें। अगर इसके लिए अगला विधानसभा चुनाव भी लड़ना पड़ा तो पीछे लड़ेंगे।

स्रोत : दैनिक भास्कर

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