हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 : तंवर ने सोनिया को भेजा इस्‍तीफा, कांग्रेस में छिड़ी जंग, सैलजा भी आईं सामने

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हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 के लिए प्रत्‍याशियो की घोषणा के बाद कांग्रेस में घमासान और बढ़ गया है। पूर्व प्रदेश प्रधान अशोक तंवर ने कांग्रेस चुनाव समिति से इस्‍तीफा दे दिया है।

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 के लिए कांग्रेस द्वारा अपने सभी 90 उम्‍मीदवारों की घोषणा करने के बाद पार्टी में घमासान और बढ़ गया है। प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष डॉ.अशोक तंवर ने पार्टी प्रत्याशियों के टिकट बंटवारे से नाराज होकर पार्टी की चुनाव समिति सहित अन्य समितियों से इस्तीफा दे दिया। तंवर ने अपना इस्‍तीफा कांग्रेस की कार्यवाहक राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष सोनिया गांधी को भेजा है। नाराज तंवर ने हरियाणा में कांग्रेस को हुड्डा कांग्रेस करार दिया। तंवर के आरोपों के बाद हरियाणा कांग्रेस अध्‍यक्ष कुमारी सैलजा भी सामने आईं। उन्होंने ने तंवर के आरोपों को अनुचित करार दिया।

यहां प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित प्रेसवार्ता में तंवर ने बताया कि उन्‍होंने पार्टी की कार्यवाहक राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर इस्तीफा दिया है। इसमें उन्होंने पार्टी के समर्पित साधारण कार्यकर्ता के रूप में काम करते रहने की बात कही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में कांग्रेस नहीं है बल्कि हुड्डा कांग्रेस है। टिकट बंटवारे में जो कुछ हुआ, उन बातों को वह दोहराना नहीं चाहते।

बता दें कि कांग्रेस द्वारा प्रत्‍याशियों की घोषणा किए जाने से पहले उन्होंने बुधवार को पार्टी मुख्यालय के समक्ष अपने समर्थकों के साथ प्रदर्शन भी किया था। इस दौरान उन्‍होंने सोहना विधानसभा क्षेत्र में एक प्रत्याशी से पांच करोड़ रुपये में टिकट का सौदा होने का आरोप लगाया था। हालांकि अब तंवर के नजदीकी लोग बता रहे हैं कि पार्टी ने उस नेता को टिकट नहीं दिया जिससे पांच करोड़ रुपये में टिकट का सौदा तय हुआ था।

तंवर ने कहा कि एक साल पहले उनकी और कार्यकर्ताओं की मेहनत से पार्टी हरियाणा में सरकार बनाने के नजदीक पहुंच गई थी मगर महत्वाकांक्षी नेताओं उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। पिछले एक साल में इन नेताओं की वजह से पार्टी की स्थिति बदतर हुई है।

तंवर ने कहा कि राज्य में उनकी पांच साल की मेहनत के बावजूद अभी तक किसी नेता उन्हें चुनाव प्रचार के लिए अधिकृत निमंत्रण नहीं दिया है। संभवतया उन्हें उनकी जरूरत नहीं है। लेकिन, यदि पार्टी हाईकमान की तरफ से कोई आदेश आएगा तो वे साधारण कार्यकर्ता के रूप में अपना काम करेंगे।

तंवर ने सोनिया गांधी को दिए ये सुझाव:
– युवा चेहरों को टिकट दी जाएं जो कार्यकर्ता सोशल इंजीनियरिंग के तहत समाज में काम करते हों।
-जिन नेताओं ने लोकसभा चुनाव लड़े, उन्हें विधानसभा चुनाव नहीं लड़ाया जाना चाहिए।
-जिन्होंने पिछले चुनाव में जमानत जब्त कराई, उन्हें भी टिकट नहीं दिया जाना चाहिए।
-जो दो या इससे अधिक बार चुनाव हार चुके हों, उन्हें भी टिकट नहीं दिया जाए।
-जिन नेताओं पर गंभीर आपराधिक मुकद्दमें दर्ज हों, उन्हें भी टिकट नहीं दिया जाए।
-जिन विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में खुलेआम पार्टी व्हिप का उल्लंघन किया, उन्हें भी टिकट नहीं मिले।
-पिछले पांच साल में जिन्होंने एक भी पार्टी का बड़ा कार्यक्रम नहीं नहीं किया, उन्हें भी टिकट नहीं मिले।
-माैजूदा विधायकों को इसलिए टिकट नहीं दिया जाना चाहिए कि क्योंकि दो लोकसभा चुनावों में पार्टी की हार हुई।
-पार्टी की युवा, महिला व अन्य प्रकोष्ठों में काम करने वाले कार्यकर्ताओं को टिकट दिए जाने में महत्व मिले।
-15 पिछड़ों, 4 से 5 मुस्लिम,8 से 10 सिखों को टिकट अवश्य मिले।
-एक या दो सीट कर्मचारी नेताओं के लिए आरक्षित हों।
-इनेलो और जजपा का राज्य में जनाधार नहीं है इसलिए इनसे आए नेताओं को टिकट नहीं दिया जाना चाहिए।

अशोक तंवर ने बुधवार और गुरुवार जो आरोप लगाए हैं वे पूर्णतया अनुचित हैं। कांग्रेस के टिकट वितरण को लेकर यदि उन्हें कुछ कहना है तो वह चुनाव समिति की बैठक में कह सकते थे। वह चुनाव समिति की बैठक में आए नहीं और अब सार्वजनिक रूप से अपनी बात कह रहे हैं, यह अनुचित है। हाईकमान की जानकारी में सब गतिविधियां हैं।

स्रोत : दैनिक जागरण

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