2014 के महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव में इन 4 दलों को नहीं मिला चंदा

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महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव 2014 में 15 राजनीतिक दलों ने कुल 464.55 करोड़ एकत्रित किए और दलों का कुल खर्च 357.21 करोड़ रुपये रहा. इनमें महाराष्ट्र के राजनीतिक दलों ने कुल 136.69 करोड़ और हरियाणा की पार्टियों ने 16.42 करोड़ रुपये खर्च किए.

हरियाणा और महाराष्ट्र में 2014 में हुए विधानसभा चुनाव में हुए खर्च का ब्यौरा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) ने प्रकाशित किया है. इस रिपोर्ट में 6 राष्ट्रीय दलों और 9 क्षेत्रीय दलों पर का खर्च का ब्यौरा शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक चुनावी खर्च के मामले में भाजपा सबसे उपर है जबकि कांग्रेस दूसरे नंबर पर है.

इस रिपोर्ट में राजनीतिक दलों को प्राप्त कुल राशि (नकद, चेक और डिमांड ड्राफ्ट में) और दलों का खर्च का विवरण शामिल है. रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव 2014 में 15 राजनीतिक दलों ने कुल 464.55 करोड़ एकत्रित किए और दलों का कुल खर्च 357.21 करोड़ रहा. इनमें महाराष्ट्र के राजनीतिक दलों ने कुल 136.69 करोड़ और हरियाणा की पार्टियों ने 16.42 करोड़ रुपये खर्च किए.

इनमें बसपा, ऑल इंडिया फॉर्वड ब्लॉक (एआईएफबी), |ऑल इंडिया मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) और जेडीयू केवल चार ऐसी पार्टियां हैं जिन्होंने चुनाव लड़ने के बावजूद केंद्र इकाई स्तर पर कुछ भी राशि प्राप्त नहीं की. इनमें एआईएफबी और आईयूएमएल और जेडीयू केवल तीन ऐसी पार्टी हैं जिन्होंने चुनाव लड़ने के बावजूद केंद्र और राज्य इकाई स्तर पर कोई खर्च नहीं किया. राजनीतिक दलों ने प्रचार पर 280 करोड़, यात्रा पर 41.40 करोड़, अन्य मदों में 22.59 करोड़ और उम्मीदवारों पर 18.16 करोड़ रुपये खर्च किए. इस तरह से प्रचार पर 77.36 फीसदी और अन्य मदों पर 6.23 फीसदी खर्च किया गया.

इनमें बीजेपी ने कुल प्राप्त राशि 296.74 करोड़ में से 217.68 करोड़ खर्च किए. जबकि कांग्रेस पार्टी ने कुल जमा रकम 84.37 करोड़ में से 55.27 करोड़ खर्च किए, जबकि एनसीपी ने 41 करोड़ और शिवसेना ने 17.94 करोड़ खर्च किए.

राजनीतिक दलों ने मीडिया विज्ञापन पर सबसे अधिक 245.22 करोड़ खर्च किया. इसके बाद प्रचार सामग्री पर 19.10 करोड़ और सार्वजनिक बैठकों पर 16.398 करोड़ खर्च किया. राजनीतिक दलों ने प्रचार के माध्यम से सबसे अधिक खर्च केंद्रीय मुख्यालय से 166.918 करोड़ किया जो चुनाव प्रचार का 59.46 फीसदी है. इसके बाद महाराष्ट्र इकाइयों ने 99.446 करोड़ यानी 35.43% और हरियाणा राज्य इकाइयों से 14.356 करोड़ (5.11%) है.

स्रोत : आज तक

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